सफ़र की चाहतों में यूँँ भटकना छोड़ देता हूँ
बहुत आसान लगता है तो रस्ता छोड़ देता हूँ
मैं वादे कर तो देता हूँ हमेशा साथ देने के
मगर मुश्किल में अपनों को अकेला छोड़ देता हूँ
मुझे डर है कि अब के बार भी दिल टूट जाएगा
सो उस से एहतियातन बात करना छोड़ देता हूँ
कभी मैं दूसरों को उन का जायज़ हक़ नहीं देता
कभी औरों की ख़ातिर अपना हिस्सा छोड़ देता हूँ
— Saurabh Sharma 'sadaf'















