ये दुनिया किस तरफ़ को जा रही है
जिधर देखो उदासी छा रही है
फ़क़त मेहमान है मालिक नहीं है
यही क़ुदरत हमें समझा रही है
तेरा दीदार भी हो जाए लेकिन
हमारी आँख आड़े आ रही है
अगर ये ज़िंदगी इक जेल है तो
रिहा होने में क्यूँ मौत आ रही है
— Saurabh Sharma 'sadaf'















