ईंसां कहाँ ज़िंदगी दो चाहता है
ये मोजज़ा तो क़िस्सा-गो चाहता है
क्या कीजे वो गर बे-वफ़ा ही सही
दिल उसे चाहता है तो चाहता है
असर दुआ में कुछ नहीं होता
वही होता है जो वो चाहता है
इतनी अच्छी अगर ये दुनिया है
'शाद' मरने को जी क्यूँ चाहता है?
— Shaad Imran















