laakh vinati karo zamaane se | लाख विनती करो ज़माने से

  - Shaad Imran

लाख विनती करो ज़माने से
बाज़ आता नहीं सताने से

बिन कहे होंठ चूम लेता है
जब कभी काम हो दिवाने से

लड़कियों से ये पूछना था मुझे
हुस्न बढ़ता है भाव खाने से?

हम तो जलते हैं उन फ़रिश्तों से
चिपके रहते जो तेरे शाने से

काम बनते हुए कई देखे
एक लड़की के मुस्कुराने से

हम भी देखेंगे, कौन रोकेगा
फ़ैज़ अहमद की नज़्म गाने से

कितना दुश्वार हो गया जीना
बाग़ का एक सेब खाने से

ख़ुदकुशी भी तो रब की मर्ज़ी है
मुझको बुलवा लिया बहाने से

  - Shaad Imran

Jalwa Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shaad Imran

As you were reading Shayari by Shaad Imran

Similar Writers

our suggestion based on Shaad Imran

Similar Moods

As you were reading Jalwa Shayari Shayari