जितने अपने हैं सब पराए हैंबात जानी जब ज़ख़्म खाए हैंये सब शराबी कोई और नहींजाँ तेरे ठुकराए, तेरे सताए हैंख़ून थूका तेरे जाने के ग़म मैंहमनें सिर्फ़ आँसू नहीं बहाए हैंमस्जिद एक रोज़ बुलाया वाईज नेहम ने कह दिया नहीं नहाए हैंमौत पढ़ती है काम करने में'शाद' सिर्फ़ बातें ही बनाए हैं— Shaad Imran