मुझ से अच्छा कोई मिला होगा

वो फ़क़त यूँ नहीं गया होगा

ये फ़िक्र मैं ने छोड़ दी कबकी
कोई मेरे बारे क्या सोचता होगा

सच बोलने में ये भी मसअला है
कोई ना कोई तो ख़फ़ा होगा

है ये कितना हसीं गुमाँ मुझ को
बिछड़ कर मुझ से वो रोता होगा

अपने जैसा तो और भी होंगे
'जॉन' जैसा न दूसरा होगा

देख कर हाल ईमान वालो का
कैसे मानू कोई ख़ुदा होगा

'शाद' तू ख़ुद को काफ़िर कहता है
इस का अंजाम बहुत बुरा होगा

— Shaad Imran

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Khafa Shayari

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