दर्द-ए-दिल देखकर हम दीवाने लगे
इस लिए तुम हमें फिर सताने लगे
रूठ कर चल दिए तुम हमें चाह कर
सबको जाकर तभी तुम मनाने लगे
झूठ उनकी वफ़ा का मुझे याद था
'इश्क़ फिर करने को सौ बहाने लगे
ज़िन्दगी फूल जैसी नहीं है मगर
ज़िन्दगी ढूँढने में ज़माने लगे
उनकी आँखें हमें भी ज़रा देख लें
सोचकर अपनी आँखें चुराने लगे
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