us daur men ik lamhe ki furqat bhi bahut thii | उस दौर में इक लम्हे की फ़ुर्सत भी बहुत थी

  - Shivang Tiwari

उस दौर में इक लम्हे की फ़ुर्सत भी बहुत थी
हाँ काम बहुत था मुझे हिम्मत भी बहुत थी

अब पास है तो कु़र्बतों का मोल नहीं है
जब दूर थे तो दीद की क़ीमत भी बहुत थी

यूँँ अश्क से मुँह मोड़ने का दिल था बहुत पर
इस दिल को कहीं अश्क की आदत भी बहुत थी

वो धूप मिटाता हवा करता हुआ इक पेड़
कंक्रीट के जंगल में ये हसरत भी बहुत थी

हर बार मेरे साथ तेरी आस थी लेकिन
इस बार की फ़ुर्क़त में तो फ़ुर्क़त भी बहुत थी

  - Shivang Tiwari

Hasrat Shayari

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