vo bade bante hain apne naam se | वो बड़े बनते हैं अपने नाम से

  - Siraj Faisal Khan

वो बड़े बनते हैं अपने नाम से
हम बड़े बनते है अपने काम से

वो कभी आग़ाज़ कर सकते नहीं
ख़ौफ़ लगता है जिन्हें अंजाम से

इक नज़र महफ़िल में देखा था जिसे
हम तो खोए है उसी में शाम से

दोस्ती चाहत वफ़ा इस दौर में
काम रख ऐ दोस्त अपने काम से

जिन से कोई वास्ता तक है नहीं
क्यूँँ वो जलते है हमारे नाम से

उस के दिल की आग ठंडी पड़ गई
मुझ को शोहरत मिल गई इल्ज़ाम से

महफ़िलों में ज़िक्र मत करना मिरा
आग लग जाती है मेरे नाम से

  - Siraj Faisal Khan

Dost Shayari

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