kaii zakhamon ki rozi chal rahi hai | कई ज़ख़्मों की रोज़ी चल रही है

  - Sohil Barelvi

कई ज़ख़्मों की रोज़ी चल रही है
हमारी आँख में इतनी नमी है

किसी सूरत मिला रब तो कहूँगा
मिरी तक़दीर क्यूँँ ऐसी लिखी है

तिरे होने से है क़ाइम तबस्सुम
अगर तू ही नहीं तो क्या ख़ुशी है

यहाँ तन्हाई का इतना असर है
मिरी आवाज़ भी अब दब गई है

किसी पर कर नहीं सकता मैं ज़ाहिर
वही इक बात जो दिल पर लगी है

यहीं रह जाएगा रक्खा हुआ सब
बरा-ए-नाम की ये ज़िंदगी है

  - Sohil Barelvi

Tanhai Shayari

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