saans aa.e kabhi chali jaa.e | साँस आए कभी चली जाए

  - Sohil Barelvi

साँस आए कभी चली जाए
हार जाएँ या मात दी जाए

ऊबने लग गया हूँ अब मौला
मेरे अंदर से ख़ामुशी जाए

क्या मरज़ है मुझे पता हो गया
अब तो दिल से ये बेकली जाए

बस ये कहता रहा फ़क़त रोगी
मौत आ जाए ज़िंदगी जाए

कुछ मरीज़ों से मैं तो बेहतर हूँ
हाए कुछ की तो क्या कही जाए

कौन ज़िंदा है अस्पतालों में
मौत बिस्तर टटोलती जाए

एक हस्सास आदमी की व्यथा
एक औरत से क्या कही जाए

ज़ीस्त मुझ को अज़ीज़ है 'सोहिल'
मौत सीने से क्यूँँ लगी जाए

  - Sohil Barelvi

Zindagi Shayari

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