वो बच्चा था
अभी तो उस ने ठीक से बोलना भी न सीखा था
अभी वो फ़क़त कुछ एक चेहरों को
पहचान पाया था
वो चेहरे जो चार-सू उस के इर्द-गिर्द घूमते रहते थे
वो चेहरे जो उस को देख कर मुस्कुराते थे
वो चेहरे जिन्हें देख कर उस ने मुस्कुराना सीखा था
उसे तो अभी ये भी मालूम नहीं था की ज़मीनो-आ
समाँ क्या है
और मौला न जाने तुझे क्या जल्दी पड़ी थी तू ने उसे
ज़मीं से जुदा कर दिया फ़लक पर बुला कर
अब बुला ही लिया तो वहाँ उस का ख़याल रखना
मुझे बहुत फ़िक्र हो रही है उस की
— Sohil Barelvi















