तुझ को भी अपने घर जल्दी जाना है
मैं तो ये समझा था तू दीवाना है
आग लगानी होगी अब उन के घर में
देश के दुश्मन से जिन का याराना है
गेंद तुम्हारे पाले में है अब सोचो
गेंद उठानी है या फिर पछताना है
सोच रहा हूँ अंबानी से बात करूँं
उस के गाँव में इंटरनेट लगाना है
हर लड़की को ये मालूम नहीं होता
कब ग़ुस्सा करना है कब शर्माना है
— Tanoj Dadhich















