ऐसे किया है इश्क़ ने ख़ुद में फ़ना मुझे
मैं ने जिया है उस को और उस ने जिया मुझे
तुझ से बिछड़ के मैं भी तो तन्हा नहीं रहा
ग़म ने तड़प ने दर्द ने अपना लिया मुझे
मुझ को तो एक हादसा ऐसा भी याद है
आँखों में आँखें डाल के लूटा गया मुझे
क्यूँ हैं मेरे सवाल पे उलझे हुए से आप
मैं तो सभी से पूछता हूँ क्या हुआ मुझे
यादों से आप की मुझे हर सू मिला है फ़ैज़
कैसे कहूँ के आपने तन्हा किया मुझे
— Tariq Faiz















