बड़े सुन्दर हैं प्यारे हैं तुम्हारे पाँव के नाख़ून
हमें लगता सितारे हैं तुम्हारे पाँव के नाख़ून
भँवर हैं गर तुम्हारी झील सी आँखें तो ये भी है
बचाने को किनारे हैं तुम्हारे पाँव के नाख़ून
कभी ख़ामोश रहते हैं कभी हमको बुलाते हैं
हमें करते इशारे हैं तुम्हारे पाँव के नाख़ून
अभी कश्मीर से हो कर के लौटे हैं तो जाने हैं
ज़रा बेहतर नज़ारे हैं तुम्हारे पाँव के नाख़ून
तुम्हारे बाल हों या गाल सब सुन्दर हैं लेकिन यार
सभी से प्यारे न्यारे हैं तुम्हारे पाँव के नाख़ून
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by RAAHI
our suggestion based on RAAHI
As you were reading Bhai Shayari Shayari