बना के तुझको रखा राज़दार उसका क्या?
किया जो तूने मुझे बे-वक़ार उसका क्या?
पुकारते हो मुझे मैं तो लौट भी आऊँ
मगर जो अब न रहा ए'तिबार उसका क्या?
बता रहे हो ज़माने को मैं गलत था पर
करी जो तुमने ख़ता बार बार उसका क्या?
ये ठीक है कि तू मजबूर था न आ पाया
मगर जो मैंने किया इंतिज़ार उसका क्या?
चलो ये मान लिया कुछ न दे सके तुमको
जो वक़्त तुम पे किया है निसार, उसका क्या?
ये ठीक है की बचाया न राब्ता मैंने
किया तो तुमने भी ये तार-तार उसका क्या?
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