हो जाएगा तुम्हारी तरफ़ का सफ़र कभी
जब याद आएगा हमें भी अपना घर कभी
इक वक़्त बा'द दिल ने भी ये मान ही लिया
सब अपने ही हैं काम अपना निकला गर कभी
मैं जैसे उस को अपना समझता हूँ वैसे ही
समझे वो ऐसा तो नहीं होगा मगर कभी
मैं पूछ बैठूँ बेकली बेचैनी का इलाज
और नाम बस तुम्हारा ही ले चारा-गर कभी
मेहंदी लगाई उस ने पर और कोई नाम की
हो ही गया 'हरेश' वो जिस का था डर कभी
— Haresh Vanza















