हमारी आँख से बरसा है ये कल रात का पानी
समझ बैठे हो जिस को आप भी बरसात का पानी
सताती ही नहीं उस को कभी फिर प्यास की शिद्दत
कि जो इक बार पी लेता है उस के हाथ का पानी
चलो अच्छा हुआ आँसू भी मेरे पी गए ये लोग
चलो कुछ काम तो आया मेरे जज़्बात का पानी
तुम्हारे वास्ते बस नाचने गाने का मौक़ा है
मुसीबत है हमारे वास्ते बरसात का पानी
ये सहरा है यहाँ दरिया समुंदर की ही बातें हैं
यहाँ मतलब निकलता है सभी की बात का पानी
— Varun Anand















