जाँ हाल-ए-दिल तुम ने सुनाया क्यूँँ नहीं
जब थी मोहब्बत तो बताया क्यूँ नहीं
इक बात तुम मुझ को बताओ जान-ए-मन
तुम ने गले मुझ को लगाया क्यूँ नहीं
जब हम तुम्हारे पास आए थे वहाँ
तो हार बाँहों का बनाया क्यूँ नहीं
वो आएगा जल्दी कहा था उस ने ये
अब तक मिरा महबूब आया क्यूँ नहीं
तैयार बैठे थे तिरे घर आने को
इतना बता तू घर बुलाया क्यूँ नहीं
उम्मीद मैं कितनी लगा के बैठा था
मेरे लिए तू फूल लाया क्यूँ नहीं
पागल बना बैठा वहाँ जो शख़्स इक
इतने दिनों से वो नहाएा क्यूँ नहीं
— Vaseem 'Haidar'















