सच कहूँ तुम सेे मोहब्बत हो रही है
क्या ख़ुदा की ये इनायत हो रही है
तुम मिरी ये बात मानो या न मानो
अब तुम्हारी मुझ को आदत हो रही है
मैं हुआ बर्बाद इक उन की दुआ से
इस लिए घर उन के दावत हो रही है
लौट आए देख कर ये माज़रा हम
वाँ मोहब्बत की तिजारत हो रही है
कह दिया बस इतना मैं ने वो मिरी है
तब से महफ़िल में वकालत हो रही है
ऐसा तुम ने क्या किया है कुछ तो बोलो
क्यूँ तुम्हारी ये शिकायत हो रही है
आज कल में उस की हो जाएगी शादी
अब तो वो लड़की से औरत हो रही है
सल्तनत उस की है तो उस के हुए सब
सल्तनत में क्यूँ बग़ावत हो रही है
— Vaseem 'Haidar'















