"तसव्वुर"
तुम ने तो कितने वादे किए थे
कि मैं शादी तुम से करूँगी
तुम्हारी बाहों में जिऊँगी मरूँगी
और कितनी बार मैं ने भी कहा था तुम मुझे छोड़ना मत
लेकिन तुम ने मेरी एक न सुनी
अब तो तुम्हारे तसव्वुर की महफ़िल सजाता हूँ
तुम्हारी यादों को अपने हुजरे में बुलाता हूँ
और अब तो तुम मेरे ख़्वाबों में हर रोज़ आने लगी हो
हक़ीक़त में तो न सही लेकिन ख़्वाबों में सताने लगी हो
लेकिन तुम से एक गिला है तुम तो चली गई मगर यादों को न ले गई
तुम्हारी याद मुझे धीरे-धीरे खा रही है
तुम्हारी बे-वफ़ाई से मेरी जान जा रही है
आख़िर तुम किस की बातों में आ गई
मेरी मोहब्बत को तुम ठुकरा गई
ये तो मैं ने सोचा भी नहीं था कि ऐसा मोड़ आएगा
चाहता हूँ जिस को वही दिल तोड़ जाएगा
मैं ने तो अपने दिल को मशवरा दे दिया
मगर मेरी जाँ तुम ने किस को दिल में दाख़िला दे दिया
सुनो तुम से ये उम्मीद बिल्कुल नहीं की थी मैं ने
लेकिन तुम ने वो भी कर दिखाया
अब मोहब्बत मुझे अच्छी नहीं लग रही
जाने क्यूँ जब कोई मोहब्बत की बात करता है तो मुझे तुम्हारे वो वादे याद आ जाते हैं
तुम को इतना ध्यान रहे तुम ख़ुदा नहीं हो
लोग पूछते हैं तो कह देता हूँ कि तुम बे-वफ़ा नहीं हो















