'तुम्हारी याद'

बहुत दिन हो गए हैं
तुम ने मुझ से बात नहीं की
क्या तुम्हें मेरे बिना रहना आ गया है
मगर मुझे तो आज तक रहना नहीं आया
तुम्हारी याद बहुत सताती है
तुम्हारी याद बहुत आती है
मगर ये सब तुम से अब कहूँगा नहीं
और ज़ुल्म तुम्हारे अब सहूँगा नहीं
अब तुम से कोई शिकायत नहीं करेगा
इक लड़का तुम्हारे बिन रह लेगा
किस पर तुम ने ज़ुल्फ़ों से बिजली गिराई होगी
क्या जान-ए-जाँ तुम को मेरी याद आई होगी
मगर तुम बात करने से कतराती हो
सो मैं तुम्हारे लायक़ तो बिल्कुल भी नहीं
तुम दूर से ही मुझ से इतराती हो
जाओ मैं तुम को अब भूलने लगा हूँ
तुम्हारी नज़र में तो मैं बरसों से मरा हूँ

— Vaseem 'Haidar'

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