जब वो बोले कि कोई प्यारा था

उन का मेरी तरफ़ इशारा था

हम निकल आए जिस्म से बाहर
उस ने कुछ इस तरह पुकारा था

फेर देता था वो नज़र अपनी
हर नज़र का यही उतारा था

डूब जाना ही ठीक था मेरा
मेरे दोनों तरफ़ किनारा था

आख़िरश बोझ हो गया देखो
मुझ को जो जिस्म जाँ से प्यारा था

— Vishal Bagh

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Kamar Shayari

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