हक़ीक़त तो हक़ीक़त है छुपा लेने से क्या होगा
ये ख़्वाबों का महल है नींद खुलते ही फ़ना होगा
तुम्हारा झूट ख़ुद जिस दिन हक़ीक़त आशना होगा
हमारा कारनामा वक़्त की उस दिन सदा होगा
किताबों से हटाया नाम लेकिन,उस से क्या हासिल
नहीं मिट पाएगा तारीख़ में जो कुछ लिखा होगा
— Wajid Husain Sahil















