Erum Zehra

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@erum-zehra

Erum Zehra shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Erum Zehra's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
  • Nazm
मिरे पाँव में पायल की वही झंकार ज़िंदा है
मोहब्बत की कहानी में मिरा किरदार ज़िंदा है

उसी के नाम से हर-वक़्त मेरा दिल धड़कता है
मैं ज़िंदा इस लिए हूँ कि मिरा दिलदार ज़िंदा हूँ

जहाँ कल हर क़दम पर मुस्कुराहट रक़्स करती थी
मैं ख़ुश हूँ आज भी वो रौनक़-ए-बाज़ार ज़िंदा है

यहाँ देखा है मैं ने ख़ुद-सरों को ख़ाक में मिलते
तिरा सर झुक गया लेकिन मिरा इंकार ज़िंदा है

मुसव्विर ने तो सारी दिलकशी तस्वीर में भर दी
रहेगा फ़न सलामत जब तलक फ़नकार ज़िंदा है

मिरी तहज़ीब मेरे साथ है महव-ए-सफ़र हर-दम
मिरे अफ़्कार ज़िंदा हैं मिरा इज़हार ज़िंदा है

'इरम' पर धूप का एहसास ग़ालिब आ नहीं सकता
मिरे सर पर अभी तक साया-ए-दीवार ज़िंदा है
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Erum Zehra
मिरा क़िस्सा भी आएगा वफ़ा की दास्तानों में
मुझे मत ढूँडते रहना जफ़ा की दास्तानों में

मैं बिंत-ए-हव्वा इक दिन में बदल दूँगी ज़माने को
मुझे मत क़ैद कर नाज़-ओ-अदा की दास्तानों में

नज़र-अंदाज़ मुझ को कर नहीं सकती कभी दुनिया
मुझे लिक्खा गया ज़ेहन-ए-रसा की दास्तानों में

मिरा दिल तोड़ने वाले कभी सोचा है ये तू ने
तिरा ही नाम आएगा सज़ा की दास्तानों में

ज़रा पूछो हवाओं से कि ये कैसे मोअ'त्तर हैं
मुझे पाओगे तुम बाद-ए-सबा की दास्तानों में

मिरे शानों पे लहराते हुए बालों को मत छेड़ो
मिरी ज़ुल्फ़ें भी शामिल हैं घटा की दास्तानों में

खुला रक्खा 'इरम' ने दिल का दरवाज़ा तिरी ख़ातिर
मिरा ही तज़्किरा होगा वफ़ा की दास्तानों में
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Erum Zehra
कितनी दूर से चलते चलते ख़्वाब-नगर तक आई हूँ
पाँव में मैं छाले सह कर अपने घर तक आई हूँ

काली रात के सन्नाटे को मैं ने पीछे छोड़ दिया
शब-भर तारे गिनते गिनते देख सहर तक आई हूँ

लिखते लिखते लफ़्ज़ों से मेरी भी कुछ पहचान हुई
सारी उम्र की पूँजी ले कर आज हुनर तक आई हूँ

शायद वो मिट्टी से कोई तेरी शक्ल बना पाए
तेरे ख़द्द-ओ-ख़ाल बताने कूज़ा-गर तक आई हूँ

सूरज की शिद्दत ने मुझ को कितना है बेहाल किया
धूप की चादर ओढ़ के सर पे एक शजर तक आई हूँ

बाबुल के आँगन से इक दिन हर बेटी को जाना है
आँखों में नए ख़्वाब सजा कर तेरे दर तक आई हूँ

अपने हाथ में इल्म की शम्अ' 'इरम' ने थामे रक्खी है
मैं तो एक उजाला ले कर दीदा-वर तक आई हूँ
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Erum Zehra