Maharaj Sir Kishan Parashad Shad

Maharaj Sir Kishan Parashad Shad

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Maharaj Sir Kishan Parashad Shad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Maharaj Sir Kishan Parashad Shad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
फ़ना कहते हैं किस को मौत से पहले ही मर जाना
बक़ा है नाम किस का अपनी हस्ती से गुज़र जाना

जो रोका राह में हुर ने तो शह अब्बास से बोले
मिरे भाई न ग़ुस्से में कहीं हद से गुज़र जाना

कहा अहल-ए-हरम ने रोके यूँ अकबर के लाशे पर
जवाँ होने का शायद तुम ने रक्खा नाम मर जाना

बक़ा में था फ़ना का मर्तबा हासिल शहीदों को
वहाँ इस पर अमल था मौत से पहले ही मर जाना

न लेते काम गर सिब्त-ए-नबी सब्र-ओ-तहम्मुल से
लईनों का निगाह-ए-ख़श्म से आसाँ था मर जाना

दिखाई जंग में सूरत उधर जा पहुँचे वो कौसर
ये असग़र ही की थी रफ़्तार इधर आना उधर जाना

यहाँ का ज़िंदा रहना मौत से बद-तर समझता हूँ
हयात-ए-जाविदाँ है कर्बला में जा के मर जाना
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Maharaj Sir Kishan Parashad Shad
अब दिमाग़-ओ-दिल में वो क़ुव्वत नहीं वो दिल नहीं
'शाद' अब अशआ'र मेरे दर-ख़ुर-ए-महफ़िल नहीं

तू मिरे अश्क-ए-नदामत की हक़ीक़त कुछ न पूछ
उस का हर क़तरा वो दरिया है जहाँ साहिल नहीं

घर ख़ुदा का था मगर बुत इस में आ कर बस गए
अब मुरक़्क़ा' है हसीनों का हमारा दिल नहीं

नुक्ता-चीं हो मेरी रिंदाना रविश पर क्यूँ कोई
मैं कोई ज़ाहिद नहीं वाइज़ नहीं आक़िल नहीं

पर्दा-दारी करती है दर-पर्दा लैला इश्क़ की
जज़्बा-ए-दिल क़ैस का है पर्दा-ए-महमिल नहीं

इंक़लाब-ए-दहर से उल्टा ज़माने का वरक़
अहल-ए-महफ़िल वो नहीं वो रौनक़-ए-महफ़िल नहीं

हिन्द में चलने लगी है अब हवा-ए-इंक़लाब
'शाद' सच है ये जगह रहने के अब क़ाबिल नहीं

साग़र-ए-मय पेश कर के शैख़ कहलाता हूँ मैं
हदिया-ए-अहक़र है ये गो आप के क़ाबिल नहीं

हक़ में अब आशिक़ के देखें फ़ैसला होता है क्या
इश्क़ का दा'वा हुज़ूर-ए-हुस्न तो बातिल नहीं
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