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Mehshar Afridi
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Mehshar Afridi
चंद
गज़
की
शहरियत
किस
काम
की
उड़ना
आता
है
तो
छत
किस
काम
की
जब
तुम्हें
चेहरे
बदलने
का
है
शौक़
फिर
तुम्हारी
असलियत
किस
काम
की
पूछने
वाला
नहीं
कोई
मिजाज़
इस
क़दर
भी
ख़ैरियत
किस
काम
की
हम
भी
कपड़ों
को
अगर
तरजीह
दें
फिर
हमारी
शख़्सियत
किस
काम
की
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Mehshar Afridi
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
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अपने
में'यार
से
नीचे
तो
मैं
आने
से
रहा
शे'र
भूखा
हूँ
मगर
घास
तो
खाने
से
रहा
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मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
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तेरे
बग़ैर
ही
अच्छे
थे
क्या
मुसीबत
है
ये
कैसा
प्यार
है
हर
दिन
जताना
पड़ता
है
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बग़ैर
उस
को
बताए
निभाना
पड़ता
है
ये
इश्क़
राज़
है
इसको
छुपाना
पड़ता
है
मैं
अपने
ज़ेहन
की
ज़िदस
बहुत
परेशाँ
हूँ
तेरे
ख़याल
की
चौखट
पे
आना
पड़ता
है
तेरे
बग़ैर
ही
अच्छे
थे
क्या
मुसीबत
है
ये
कैसा
प्यार
है
हर
दिन
जताना
पड़ता
है
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इतना
मजबूर
न
कर
बात
बनाने
लग
जाए
हम
तेरे
सर
की
क़सम
झूठ
ही
खाने
लग
जाए
इतने
सन्नाटे
पिए
मेरी
समा'अत
ने
कि
अब
सिर्फ़
आवाज़
पे
चाहूँ
तो
निशाने
लग
जाए
मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
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तेरी
ख़ता
नहीं
जो
तू
ग़ुस्से
में
आ
गया
पैसे
का
ज़ो'म
था
तेरे
लहजे
में
आ
गया
सिक्का
उछालकर
के
तेरे
पास
क्या
बचा
तेरा
ग़ुरूर
तो
मेरे
काँसे
में
आ
गया
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ग़म
की
दौलत
मुफ़्त
लुटा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
अश्कों
में
ये
दर्द
बहा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
तू
ने
तो
औक़ात
दिखा
दी
है
अपनी
मैं
अपना
मेयार
गिरा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
एक
नजूमी
सबको
ख़्वाब
दिखाता
है
मैं
भी
अपना
हाथ
दिखा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
मेरे
अंदर
इक
ख़ामोशी
चीख़ती
है
तो
क्या
मैं
भी
शोर
मचा
दूँ
बिल्कुल
नहीं
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Mehshar Afridi
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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