@nazimali36965
Ali Nazim shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ali Nazim's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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मैं तो ये सोच भी नहीं सकता
तेरे बिन तो मैं जी नहीं सकता
हाथ में है तिरे लबों का जाम
अपने होंटो को सी नहीं सकता
नंगे तो सब इक जैसे लगते हैं
कपड़ो मैं तो सब अच्छे लगते हैं
साथ हमारे तुम प्यारे लगते हो
साथ तुम्हारे हम कैसे लगते हैं
अगर जो छोड़कर ऐसे मुझे तू यार जाएगी
तो ऐसे तो मेरी जाँ ज़िंदगी से हार जाएगी
मोहब्बत हो गई है मुझको भी लेकिन मुझे डर है
या तो अब मैं ही जाऊँगा या फिर दस्तार जाएगी
लोगों को अब तो चाहिए दौलत हराम की
इज़्ज़त को कौन मानता है अपने काम की
जिसको भी उसकी आँख ने देखा है इक दफ़ा
उसको नहीं कोई भी ज़रूरत है जाम की
मुकम्मल काम सारे कर लिए हैं
हरे जो ज़ख़्म थे सब भर लिए हैं
तुम्हें मेरी घुटन का क्या बताऊँ
बड़े इल्ज़ाम अपने सर लिए हैं
एक दिन तो लॉटरी अपनी लगेगी
ज़िंदगी उसके लिए पूरी लगेगी
एक दिन हम साहिब-ए-मंसब भी होंगे
एक दिन मेरे भी सर पगड़ी लगेगी
मेरा महबूब मिलने के तरीक़े से नहीं मिलता
सलीक़ा जानता है पर सलीके से नहीं मिलता
यार मुझको आपसे अब तो मुहब्बत भी नहीं है
और मुझको मेरे घर से ये इजाज़त भी नहीं है
आप तो कर भी नही सकते दुआ हक़ में हमारे
मत करो अब आपको कोई ज़रूरत भी नहीं है
मिल गई है आप को तो पीर की पगड़ी भी लेकिन
मेरे हिस्से में मगर मेरी ख़लीफ़त भी नहीं है
छोड़ कर जाता नहीं कोई निशानी पानी
खा हमारी गया पूरी ये जवानी पानी
गन्दी लड़की को दिखाती नहीं जलवा मिट्टी
अच्छी लड़की को सुनाता है कहानी पानी
वो मेरे पास से वापस अगर आकर नहीं जाता
तो मेरी आँख से उसका कभी पैकर नहीं जाता
जो उसके पास से होकर गुज़र जाए कभी तो फिर
बसर कोई भी हो अपने सलामत घर नहीं जाता
पहले तो उसको पढ़ाया बाप ने
उसको पैरों पर जमाया बाप ने
एक कर डाले थे अपने रात दिन
धूप में ख़ुद को जलाया बाप ने
मिरे दिल को दुखाती हो चलो जाना दुखा लो तुम
तुम्हें दिल को रिझाना है ख़ुशी से अब रिझालो तुम
तिरी डोली उठेगी तो जनाज़ा तो उठेगा ही
चलो मैं भी कफ़न पहनूँ चलो ख़ुद को सजा लो तुम
जहाँ वाले चुरा लेंगे तुम्हें मुझसे मिरी लैला
किसी महफ़ूज़ ख़ेमे में ज़रा ख़ुद को छुपा लो तुम