लोगों को अब तो चाहिए दौलत हराम कीइज़्ज़त को कौन मानता है अपने काम कीजिस को भी उस की आँख ने देखा है इक दफ़ाउस को नहीं कोई भी ज़रूरत है जाम की— Ali Nazim Adam