Pandit Daya Shankar Naseem lakhnavi

Pandit Daya Shankar Naseem lakhnavi

@pandit-daya-shankar-naseem-lakhnavi

Pandit Daya Shankar Naseem lakhnavi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Pandit Daya Shankar Naseem lakhnavi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
क़ुर्स-ए-ख़ुर को देख कर तस्कीं रख ऐ मेहमान-ए-सुब्ह
ता-दहान-ए-शाम पहुँचाता है राज़िक़ नान-ए-सुब्ह

मअ'नी-ए-रौशन जो हों तो सौ से बेहतर एक शेर
मतला-ए-ख़ुर्शीद काफ़ी है पए-दीवान-ए-सुब्ह

सैर-चश्मी दीद के भूखों की देखो कहती है
मह पनीर-ए-शाम है ख़ुर्शीद-ए-ताबाँ नान-ए-सुब्ह

सदक़े उस पर्वरदिगार-ए-पाक के जिस ने किया
बहर-ए-तिफ़्ल-ए-ग़ुंचा पैदा शीर-ए-बे-पिस्तान-ए-सुब्ह

सुब्ह-दम ग़ाएब हुए 'अंजुम' तो साबित हो गया
ख़ंदा-ए-बेहूदा पर तोड़े गए दंदान-ए-सुब्ह

वस्ल की शब आँख दिखला कर ये अंजुम कहते हैं
लो क़यामत आई मशरिक़ से उठा तूफ़ान-ए-सुब्ह

देखे वो गुलशन जो दिन-दो-दिन रहे याँ मिस्ल-ए-गुल
हम तो शबनम-साँ 'नसीम' एक दम के हैं मेहमान-ए-सुब्ह
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Pandit Daya Shankar Naseem lakhnavi
जब हो चुकी शराब तो मैं मस्त मर गया
शीशे के ख़ाली होते ही पैमाना भर गया

ने क़ासिद-ए-ख़याल न पैक-ए-नज़र गया
उन तक मैं अपनी आप ही ले कर ख़बर गया

रूह-ए-रुवान-ओ-जिस्म की सूरत मैं क्या कहूँ
झोंका हवा का था इधर आया उधर गया

तूफ़ान-ए-नूह इस में हो या शोर-ए-हश्र हो
होता जो कुछ है होगा जो गुज़रा गुज़र गया

समझा है हक़ को अपने ही जानिब हर एक शख़्स
ये चाँद उस के साथ चला जो जिधर गया

शोरीदगी से मेरी यहाँ तक वो तंग थे
रूठा जो मैं तो ख़ैर मनाई कि शर गया

मैं ने भी आँखें देखी हैं परियों की जाओ भी
तुम ने दिखाई आँख मुझे और मैं डर गया

गुज़रा जहाँ से मैं तो कहा सुन के यार ने
क़िस्सा गया फ़साद गया दर्द-ए-सर गया

काग़ज़ सियाह करते हो किस के लिए 'नसीम'
आया जवाब-ए-ख़त तुम्हें और नामा-बर गया
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