बेवजह ही मुस्कुरा कर देखना है
दोस्त को अब आज़मा कर देखना है
बोलते सब हैं बुरा इंसान हर दम
पर गले उस को लगाकर देखना है
आज तक समझा नहीं मैं बे-वफ़ा को
दिल मुझे भी अब जलाकर देखना है
एक ख़्वाहिश को मुकम्मल चाहता हूँ
टूटता रिश्ता बचाकर देखना है
— Ganesh gorakhpuri















