नहीं दिल मेरा मुस्तहकम ठिकाना है
मुसाफ़िर का बदलता आशियाना है
हमारा दिल लगा है जिस बग़ीचे में
वहाँ के फूल को भी टूट जाना है
हमारी रात या'नी सिर्फ़ तन्हाई
तुम्हारे साथ तो सारा ज़माना है
अभी बाक़ी है उम्र-ए-शायरी मेरी
तिरी आँखों से इक दरया बहाना है
ज़रा समझो मिरे हालात भी 'यामिर'
नहीं लगता है दिल लेकिन लगाना है
— Yamir Ahsan















