यूँँ कोई बे वफ़ा नहीं होता
बे सबब ही जुदा नहीं होता
आ गए लोग कुछ मदद करने
हर कोई तो बुरा नहीं होता
किस घड़ी किस को मौत आ जाए
ये किसी को पता नहीं होता
जंग दुश्मन से जीत ली मैं ने
हौसला हो तो क्या नहीं होता
ऐसे रस्ते पे चल पड़ा हूँ मैं
ख़त्म ही रास्ता नहीं होता
— Zafar Siddqui















