मिले न जब कहीं क़रार जौन को पढ़ा करो

ग़मों में आएगा निखार जौन को पढ़ा करो

किताब में उसी की सब निशानियों को देख कर
रहो न तुम यूँ अश्क़बार जौन को पढ़ा करो

ये चार सू ग़ुबार जो यहाँ प तीरगी के हैं
हटेंगे वो सभी ग़ुबार जौन को पढ़ा करो

अगर तुम इंतिज़ार में रहो कहीं प मुब्तला
मिलेगा लुत्फ़-ए-इंतिज़ार जौन को पढ़ा करो

कि शाइरो की बज़्म में मिलेंगी तुम को इज़्ज़तें
बढ़ेगा हर जगह वक़ार जौन को पढ़ा करो

मिरे ग़मों से आश्ना रहोगी मेरी फ़ारेहा
बना के ज़ुल्फ़-ए-बे क़रार जौन को पढ़ा करो

ख़याल में हज़ार नाम आएँगे ज़रूर, पर
सभी को कर के दरकिनार जौन को पढ़ा करो

इलाज दर्द का कई दफ़ा तलब किया गया
कहा ज़मन ने बार-बार जौन को पढ़ा करो

— Zaman Zaidi ZAMAN

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Manzil Shayari

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