muhabbat kab hua karti thii yuñ taalaab men pahle | मुहब्बत कब हुआ करती थी यूँँ तालाब में पहले

  - 100rav

मुहब्बत कब हुआ करती थी यूँँ तालाब में पहले
कहाँ तब जिस्म था इन लोगों के ख़ूनाब में पहले

चलो अच्छा हुआ है कुछ तो इस जिस्मानी चाहत में
वगरना दाग़ देखा जाता था महताब में पहले

जिसे देखो मुहब्बत में फ़ना होने को राज़ी है
कभी ये छोड़ते थे गाँव भी सैलाब में पहले

सरासर झूठ है ये 'इश्क़ भी कमज़ोर करता है
कहाँ पानी शराबी पीता था ज़हराब में पहले

कहा है डॉक्टर ने नींद वाली गोली लो 'सौरभ'
नहीं सो पाता था मैं भी उसी के ख़्वाब में पहले

  - 100rav

Ulfat Shayari

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