गुलाबों से भरा बाज़ार हूँ मैं
हज़ारों आशिकों का प्यार हूँ मैं
मोहब्बत सोचा था सब कुछ है गर अब
मोहब्बत से ख़ुदा बे-ज़ार हूँ मैं
तेरे से मैं कभी भी दूर नइँ हूँ
गले में तेरा पहना हार हूँ मैं
ये है मा'लूम के शहज़ादी है तू
मगर ये याद रख शहकार हूँ मैं
इसी का फ़ाइदा लेती हैं हर दिन
के उस के सामने लाचार हूँ मैं
वफा की राह में धोखे मिले हैं
मुझे ऐसा लगा हुश्यार हूँ मैं
— Adarsh Anand Amola















