इब्तिदा यूँँ की तेरी तरफ़ रहगुज़र मुस्कुराने लगा
देख मुझ को तेरी राह में हर शजर मुस्कुराने लगा
सब थे बैठे उदासी में ही सुख तमाशे में था ही नहीं
आप का जिक्र ही बस हुआ खेल-घर मुस्कुराने लगा
इतना प्यारा है तू दिलरुबा बाँटे सब में ख़ुशी ही ख़ुशी
फूल खिलने लगे उस जगह तू जिधर मुस्कुराने लगा
— Adarsh Anand Amola















