duniya ki mushkilaat se aage nikal ga.e | दुनिया की मुश्किलात से आगे निकल गए

  - Adnan Raza

दुनिया की मुश्किलात से आगे निकल गए
जो लोग नफ़्सियात से आगे निकल गए

तालिब तमाम 'उम्र किताबों में रह गया
दरवेश क़ाएनात से आगे निकल गए

मस्जिद की सीढ़ियों पे मेरी आँख लग गई
और ख़्वाब पुलसिरात से आगे निकल गए

इक अजनबी की आँख से निकले हुए सुख़न
मेरे तसव्वुरात से आगे निकल गए

दफ़्तर तेरा भला हो के मसरूफ़ियत में हम
दिल के मुआमलात से आगे निकल गए

उल्फ़त बड़े कमाल की हम सेे क़ज़ा को थी
हम भी ज़रा हयात से आगे निकल गए

बचपन में दिल को मारना सीखा था इसलिए
हम लोग ख़्वाहिशात से आगे निकल गए

लिक्खे जो उस निगाह ने माने शराब के
साकी तेरी लुग़ात से आगे निकल गए

शर्तएरज़ा में सिर्फ़ मुहब्बत की बात थी
अदनान तुम तो बात से आगे निकल गए

  - Adnan Raza

Life Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Adnan Raza

As you were reading Shayari by Adnan Raza

Similar Writers

our suggestion based on Adnan Raza

Similar Moods

As you were reading Life Shayari Shayari