ख़ाली घरों में गूँजती आवाज़ सुन के डर गया
सीने में दिल मकीन था वीरानियों से मर गया
लो फिर से रात हो गई इक और दिन गुज़र गया
हर रोज़ ये ही ज़िन्दगी दिल ज़िन्दगी से भर गया
मैं सुख में हूँ के दुख में हूँ मुझको भी कुछ ख़बर नहीं
तू देख कर बता मुझे बिखरा हूँ या सँवर गया
सूरज कि रौशनी मिली तो चाँदनी बिछड़ गई
इक ख़ाब के तले मेरा इक ख़्वाब दब के मर गया
शायद ये दोस्ती रज़ा अंजाम तक पहुँच गई
उकता गया हूँ मैं भी और दिल आपका भी भर गया
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