हैं सब की सब हमारी ही खताएँ
हमारे पास बिल्कुल भी न आएँ
यहाँ पर दाल गलनी ही नहीं है
कहीं पर और जा कर दिल लगाएँ
हमें झगड़ा नहीं करना है लेकिन
तुम्हें ज़्यादा नशा हो तो बताएँ
ज़रूरत पड़ गई है फिर से कोई
चलें अब फिर से हम पर हक़ जताएँ
सफ़ाई हमको देनी ही नहीं है
जलाएँ आप अपना दिल जलाएँ
है सब कुछ उल्टा पुल्टा ज़िंदगी में
कहो तो जीत का मातम मनाएँ
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