सिर्फ़ आँखों के इशारे नहीं काफ़ी होंगे

इश्क़ में इतने ख़सारे नहीं काफ़ी होंगे

चाँद को है ये ख़बर कुछ तो कमी रहनी है
उन की ख़ातिर ये सितारे नहीं काफ़ी होंगे

मानते हैं कि बहुत आग है तेरे अंदर
मुझ को इतने तो सरारे नहीं काफ़ी होंगे

चार दिन की ये मोहब्बत तो नहीं है मेरी
और फिर चार हमारे नहीं काफ़ी होंगे

आँखों को शौक़ है देखें वो तुम्हें पहरों तलक
आँखों को इतने नज़ारे नहीं काफ़ी होंगे

— Arohi Tripathi

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