ऐसा नहीं कि मुझ को मुहब्बत नहीं हुई

इज़हार करने की कभी सूरत नहीं हुई

स्कूल ले गया था मैं उस के लिए गुलाब
लेकिन गुलाब देने की हिम्मत नहीं हुई

हालात ऐसे थे कि समझदार हो गए
बचपन में हम से कोई शरारत नहीं हुई

क्यूँ छोड़ कर गया तू मुझे ऐसे हाल में
क्या एक बार भी तुझे ग़ैरत नहीं हुई

इक अप्सरा पे वार दी सारी मुहब्बतें
फिर उस के बा'द मुझ को मुहब्बत नहीं हुई

तुझ से भी ज़्यादा क़ीमती लोगों से बिछड़ा हूँ
सो तेरे छोड़ जाने पे हैरत नहीं हुई

देवी बता के औरतों को पूजते तो हैं
पर औरतों की देश में इज़्ज़त नहीं हुई

— Daqiiq Jabaalii

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