सोच से यक-क़लम ही बौने लोग

मेरे अतराफ़ हैं घिनौने लोग

दुनियादारी की सीख देते हैं
हमें आ कर के औने-पौने लोग

टूट कर भी ये मुस्कुराते हैं
बन गए दहर के खिलौने लोग

दोस्त तुमको मिले बहुत उम्दा
हमने पाए तो बस अलौने लोग

ख़ाली-ख़ाली से हैं उदास सभी
दैर में सूखते से दौने लोग

— Daqiiq Jabaalii

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