तुम क्या जानो शाइ'र कितना ग़म सहता है
तब जा कर के दो मिसरों में कुछ कहता है
दुनिया भर में ढूँढा मैं ने तब ये जाना
तूँ तो मेरे दिल के भीतर ही रहता है
वो तो झूठा है जो रोता है महफ़िल में
सच्चा आँसू तो तन्हाई में बहता है
— Daqiiq Jabaalii
तब जा कर के दो मिसरों में कुछ कहता है
दुनिया भर में ढूँढा मैं ने तब ये जाना
तूँ तो मेरे दिल के भीतर ही रहता है
वो तो झूठा है जो रोता है महफ़िल में
सच्चा आँसू तो तन्हाई में बहता है
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