nazar se pilaai kaha kuchh nahin | नज़र से पिलाई कहा कुछ नहीं

  - Dharamraj deshraj

नज़र से पिलाई कहा कुछ नहीं
नशा फिर भी यारो हुआ कुछ नहीं

लिया कुछ नहीं और दिया कुछ नहीं
कहाँ खो गया दिल पता कुछ नहीं

खफ़ा हो तो बेशक़ मिरी जान लो
तग़ाफुल से बढ़कर बुरा कुछ नहीं

भला हूँ बुरा हूँ पता है उसे
मिरे रब से आख़िर छुपा कुछ नहीं

असर हो दवा में तो हो किस तरह
अगर साथ में हो दु'आ कुछ नहीं

फ़क़त उनका ख़्वाबों में बोसा लिया
बहुत कुछ हुआ और हुआ कुछ नहीं

रहे या मिटे बादशाहत 'धरम'
करे जो किसी का भला कुछ नहीं

  - Dharamraj deshraj

Nazar Shayari

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