अजनबी से शहर को अपना बनाया
ये ज़रूरत नाम पर क्या क्या बनाया
गाँव का घर स्वर्ग समझा देर से मैं
फ़ार्म हाउस नाम का सपना बनाया
टूटे दिल को टूटा ही रहने दे जी आप
दिल दे दे कर घाव को गहरा बनाया
खेल को इक रात का कैसे समझता
बूँद से जिसने समंदर था बनाया
हाल-ए-दिल जाना धरम का और उसने
जाल-ए-दिल का रास्ता पक्का बनाया
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