तसव्वुर में बिठा कर ले गए हो
उसे अपना बना कर ले गए हो
मुझे आज़ाद तो जाना था कर के
अगर पिंज़रा उठा कर ले गए हो
बड़ी मुश्किल में हूँ रहना कहाँ है
मिरा घर ही सजा कर ले गए हो
बताओ धड़ भला किस काम का है
वो सर जिस का जुदा कर ले गए हो
शहर में और भी धन के घड़े थे
मिरा दिलबर चुरा कर ले गए हो
किसी की रात काली कर गए हो
किसी दिन का दिवाकर ले गए हो
— Dinesh Sen Shubh















