उस की नज़रों में ठिकाना चाहिए

कुछ तो जीने का बहाना चाहिए

मंज़िलें मिलने से पहले सैर में
रास्ते का लुत्फ़ पाना चाहिए
इश्क़ की दहलीज़ से जो आए हो
हादसा कुछ तो बताना चाहिए

प्यास बुझती है कहाँ पानी से अब
अब छलकता जाम आना चाहिए

उस को पाने की फ़क़त चाहत है तो
घर में उस के आना जाना चाहिए

आबरू से इश्क़ के मतदान में
बाप का साफ़ा बचाना चाहिए

छोड़ना महबूब को पड़ जाए तो
महफ़िलों में गीत गाना चाहिए

ग़म कोई ईजाद फिर होगा नहीं
ग़म को ही हमदम बनाना चाहिए

— Dinesh Sen Shubh

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