मुझे मालूम है मैं झूठ लिक्खूँगा
उसे मालूम है मैं झूठ लिक्खूँगा
सभी करते हैं तख़मीनी कहानी में
किसे मालूम है मैं झूठ लिक्खूँगा
लिखूँगा अस्लियत उस की ग़ज़ल में सब
जिसे मालूम है मैं झूठ लिक्खूँगा
यक़ीं सबको है मेरे रोज़ना
में पर
भले मालूम है मैं झूठ लिक्खूँगा
नहीं लिक्खूँगा मैं अपनी कहानी ख़ुद
मुझे मालूम है मैं झूठ लिक्खूँगा
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