ijaazat ho sunaau yaar ghazlen | इजाज़त हो सुनाऊँ यार ग़ज़लें

  - Gaurav Singh

इजाज़त हो सुनाऊँ यार ग़ज़लें
बदन के ज़ाविये पर चार ग़ज़लें

कई सौ शे'र तन्हा हो गए और
ग़ज़ल के नाम पे बस चार ग़ज़लें

हमारा काम अच्छा चल रहा था
हमें भी हो गई दुश्वार ग़ज़लें

हमारी ज़िंदगी में यूँँ समझिए
निभाती हैं कई क़िरदार ग़ज़लें

लगाते हैं अभी जो प्यार की रट
कहेंगे एक दिन दीं-दार ग़ज़लें

हुए हैं जिसके चक्कर में ग़ज़लगो
उसी को लग रही बेकार ग़ज़लें

ग़ज़ल के रोग से बचकर के रहिए
करे हैं ठीक को बीमार ग़ज़लें

किसी के वास्ते दरिया सी गहरी
किसी के वास्ते पतवार ग़जलें

हमारी बात चाहो लिख के ले लो
करेंगी एक दिन यलग़ार ग़ज़लें

अगर बरसा सके हैं फूल ग़ज़लें
उठा सकती हैं फिर तलवार ग़ज़लें

समझ आने लगी है धीरे धीरे
हमें भी मीर की तहदार ग़ज़लें

  - Gaurav Singh

Aawargi Shayari

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